Monday, December 14, 2009

एक भव्य संकीर्तन यात्रा



हरे कृष्णा
प्रभु जी आप सब को ये जानकर अति हर्ष होगा के हमारे MISSION द्वारा एक भव्य संकीर्तन यात्रा का आयोजन हो रहा है| संकीर्तन यात्रा 20-DEC-2009 को अंगद जी के घर से सुबह 10 बजे शुरू होगी|
यात्रा जनकपुरी मायो स्कूल से शुरू होगी, उसके बाद जनकपुरी सब्जी मंडी, जनकपुरी मेन मार्केट, त्रिवणी धाम मंदिर, ओशियन प्लाज़ा, शालीमार गार्डन चौक, बी ब्लाक पार्क, शिव चौक, बिजलीघर से होते हुए गणेशपुरी में नारदीय भक्ति धाम पर विराम होगी|
आप सभी भक्तगण संकीर्तन यात्रा में सादर सपरिवार आमंत्रित है| संकीर्तन यात्रा में पधारे और आपने इस जीवन को हरि भजन में लगायें|

निवदेक
समस्त नारदीय भक्त

हरे कृष्णा

Sunday, September 6, 2009

पहली संकीर्तन यात्रा

हरे कृष्ण

प्रभु जी आज मंदिर में MEETING थी जिसमे मिशन की होने वाली संकीर्तन यात्रा के बारे में चर्चा हुई|

1. मिशन अपनी पहली संकीर्तन यात्रा 2 अक्टूबर 2009 (Mission Birthday) को निकालेगा|
जिसका विवरण इस प्रकार है यात्रा 2 अक्टूबर को त्रिवणी धाम से होकर जनकपुरी, गौर प्लाजा, शिव चौक,शालीमार गार्डन B - BLOCK से होकर गणेशपुरी में मंदिर पर पूर्ण होगी|

मिशन की यात्रा की एक खास पहचान होगी, इसमें सब भक्त धोती और कुर्ते में न होकर धोती और T-Shirt में होंगे| जिससे लोग भक्तो को पंडित जी ना समझ कर भक्त समझे| हमारा उद्देश्य धोती कुर्ते वाले लोगो को इकट्ठा करना नहीं है हमारा मकसद भगवान के भक्तो को भगवान की सेवा में लगाना है|

हरे कृष्ण हरी बोल राम राम भोले नाथ की जय
आपका दास
नारद प्रिय दास
7/09/2009

Saturday, August 29, 2009

हरे कृष्ण
प्रभु जी २३ अगस्त २००९ को मिशन ने कुछ नियम बनाये जो सभी भक्तो मानने होंगे| ये कुछ सामान्य नियम है जो कि श्री नारद जी महाराज के शिष्यों को मान्य होंगे :-

नियम वो रस्सी है जो किसी ऊचाई पर चड़ने के लिए हमारी सहायता करते है| अगर आप किसी वस्तु को पाना चाहते है तो आपको किसी उद्देश्य कि आवश्यकता होगी और उस उद्देश्य को पाने के लिए आपको कुछ नियमो का पालन करना होता है

हमारे आराध्य देव = श्री कृष्ण

हमारे गुरु जी = श्री श्री देवऋषि नारद जी महाराज

हमारे उद्देश्य = भगवान श्री कृष्ण से दिव्य मिलन
भगवान के दिव्य नाम का प्रचार

जप का मन्त्र = हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे


मिशन के शुरूआती नियम जो सबको मान्य होंगे :-

१. मांसाहार का निषेध
२. अवैध संबंधो का निषेध
३. नशीली वस्तुओं का निषेध
४. नित्य हरे कृष्ण महामन्त्र की ४ माला करना

कुछ और नियम जो की बड़े भक्तो को पालन करने होंगे :-

१. चाय, कोफी, लहसुन और प्याज का निषेध
२. बाहर का खाना जितना हो सके नहीं खाएं
३. नित्य हरे कृष्ण महामन्त्र की १६ माला करना
४. नित्य संकीर्तन में आना
५. नित्य भक्तों के साथ बातचीत
६. नित्य धार्मिक पुस्तकों का पाठन

Mission Rules

HARE KRISHNA,

PRABHU JI ON 23RD OF AUGUST OUR MISSION DESSIDE SOME RULES TO BE FOLLOWED BY EACH AND EVERYONE. THESE ARE THE BASIC RULES TO BE FOLLOWED BY HIS GRASE SHRI NARAD JI’S DESIPLES.

RULES ARE THE ROPE THAT WILL HELP ANYONE TO CLIMB THE HIGHT. TO ACHIVE SOMETHING YOU NEED TO SET ONE GOEL, TO GET THAT GOEL YOU NEED SOME RULES THAT LED TO THE GOEL.

ADORABLE GOD = SHRI KRISHNA

OUR GURUJI = SHRI SHRI DEVRISHI NARAD JI

ULTIMATE GOAL = DEVINE MEET WITH LORD KRISHNA
DIVINE NAME PROPOGATION

MANTRA WE CHANT = HARE KRISHNA HARE KRISHNA KRISHNA KRISHNA HARE HARE
HARE RAMA HARE RAMA RAMA RAM HARE HARE


OUR MISSION SET 4 BASIC RULES THAT ARE AS FOLLOW :-

1. NONVEG PREVENTION
2. ILLICIT AFFAIRS PROTEST
3. DO NOT USE INTOXICANTS
4. FOUR (4) ROUND MALA OF HARE KRISHNA MAHAMANTRA DAILY.

THERE ARE SOME MORE RULES FOR THE UPPER LEVEL BHAKTS :-

1. TEA, COFFEE, ONION, GARLIC PREVENTION
2. DO NOT EAT OUTSIDE
3. 16 ROUND OF MAHAMANTRA MALA DAILY
4. NITYA SANKIRTAN
5. NITYA DEVOTEE INTERACTION
6. READING SPRITUAL BOOKS (BHAGWAT GEETA, GEETA PRESS BOOKS, ETC..)

Thursday, August 20, 2009

16 August 2009 पहला उमंग उत्सव|

हरे कृष्णा,

16 अगस्त को मिशन ने अपना पहला उमंग उत्सव मनाया| उसके कुछ अंश प्रस्तुत कर रहा हूँ| उमंग उत्सव में जो संकीर्तन किया गया उसको करके सबका दिल ख़ुशी से झूम उठा| संकीर्तन इतना भव्य था कि क्या कहना, सभी भक्त संकीर्तन में नृत्य कर रहे थे| सब इस बात से बहुत खुश थे कि मिशन का पहला उमंग उत्सव था, पर जैसा के अब तक होता आया है भगवान ने इस बार भी हमे बहुत सताया| सुबह से ही बारिश हो रही थी| सुबह 8 बजे से लाइट नहीं थी, जिसके कारण इन्वेर्टर भी काम नहीं कर रहा था| जैसे - तैसे बैटरी का प्रबंध किया गया जिससे शाम का संकीर्तन हुआ| उसके बाद भारत जी का चरित्र का नाट्य रूपांतरण किया गया| जिसका सारा श्रेय रासबिहारी प्रभु को जाता है| उन्होंने नाटक का सारा जिम्मा ले रखा था, नाटक के लिए पात्र चुनना और उनको सही-सही मार्गदर्शन करना सब उनका काम था| ये उन्ही की मेहनत का फल था जो नाटक इतना अच्छा हुआ की सबकी आँखों में आंसू आ गए| उसका वर्णन में नहीं कर पाउँगा, जो उस नाटक को देख पाया उसने समझा है की भारत जी का चरित्र कैसा था कोई राम जी से इतना प्यार कैसे कर सकता है, आज के युग में जो भाई दुसरे भाई के दुःख में साथ नहीं देता, अगर आज भाई भाई में इतना प्यार हो जाये तो ये पृथ्वी वापस स्वर्ग बन जायेगी|

भरत जी के बारे में मैं आपको क्या बताऊ पर नाटक को देख कर ऐसा लगा जैसे साक्षात् भरत जी हमारे सामने खड़े हो| वृन्दावन प्रभु ने भरत जी का चरित निभाया| वो साक्षात् भरत जी लग रहे थे| बस इसके बाद मैं और कुछ नहीं कह सकता क्योंकि भरत जी के चरित्र का वर्णन करना राम जी के बस में नहीं तो मैं किस खेत की मुली हूँ|
बस इतना कह सकता हूँ के भरत जैसा भाई इस संसार मैं पहले कभी नहीं हुआ, न है, और न कभी होगा|

भरत जी महाराज की जय
हरे कृष्ण
आपका दास
नारद प्रिय दास